Fellow travellers

Saturday, July 29, 2017



 कौन पढ़ता है किताबें ? क्यूँ पढ़ी जाती हैं किताबें?

कुछ  लोग किताबें पढ़ते हैं प्रेरणा पाने के लिए , कुछ लोग पढ़ते हैं कुछ समय के लिए इस दुनिया को भूल जाने के  लिए । कुछ लोग ज्ञान बढ़ाने के लिए, कुछ अपना व्यक्तित्व उभारने के लिए पढ़ते हैं.

कुछ लोग इसलिए भी पढ़ते  हैं  किताबें कि कह सकें कि हमने यह किताब पढ़ी है, और उस कृति के गौरव के  प्रतिफलित आलोक में खुद को भी आलौकिक महसूस करें ।

कुछ लोग अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं किताबों में, कुछ अपनी रुचियों में और महारथ हासिल करने करने के लिए किताबें पढ़ते हैं ।

कोई ख़ुद को किताबों मे खो देना देना चाहता है, कोई उनमे ख़ुद को पाना चाहता है.
कोई खुद के मन को समझना चाहता है, कोई दूसरों की सोच को समझना चाहता है

कोई अपनी धरोहर का इतिहास जानना चाहता है, कोई उसकी विशालता और वैभवता  नापना चाहता है
कोई अनदेखे शहरों की अनसुनी कहानी पढ़ना चाहता है, उनके समुंदरों की फेनिल आभा छवियों में देखना चाहता है।


कोई भविष्य की सम्भावनांओं को आंकना चाहता है, बदलती दुनिया की तेज़ रफ़्तार से कदम  मिलाना चाहता है,
कोई कुछ पल वही पुराने दिनों का ठहराव महसूस करना चाहता है, फुर्सत की , बेफ़िक्री की दुपहरें फिर जीना चाहता है


कोई व्यंग में आमोद ढूंढता है, कोई दर्द में ख़ूबसूरती
जो इस तरह जिये के मिसाल बन गए, कोई उनकी कहानी पढ़के जीने का ढंग सीखना चाहता है, कोई उस महानता का विलम्बित साक्षी बन इस बात भर से मुग्ध होना चाहता है, ख़ुद को आश्वस्त करना चाहता है कि यह स्तर भी संभव है

कोई कविता का पुजारी है, कोई ग़ज़लों का, तो कोई कहानियों का

कोई तर्क से परे भावुकता के स्वप्न देश में बहना चाहता है, कोई तर्क, विज्ञान, न्याय शास्त्र के के सूत्र ढूंढना चाहता है।

फिल्मों की दुनिया , खेल, सँगीत, पर्यावरण और प्रकृति की दुनिया, यह सब ढूंढता है किताबों में।
और मज़े की बात यह है कि हर तरह के सक्स की हर तरह की ज़रुरत के लिए किताबें किसी न किसी ने लिख रखी हैं ।

पर यह किताबों की दुनिया किसी भूलभुलैया से कम नहीं, अनगिनत  तारा मंडलों से भरे ब्रम्हाण्ड से कम नहीं;
किसी महादेश से कम नही।
ऐसे में किसी ग़लत दिशा में चलना, अपनी मन चाही कृति का न मिल पाना, सही सोचकर चुने हुए रास्ते  पर चलते हुए अंत में निराशा का हाथ आना, कोई बड़ी बात नहीं ।

जिस प्रकार कोई व्यक्ति जब किसी दार्शनिक स्थान को देखता है, वह सिर्फ उस स्थान को ही नहीं बल्कि उस स्थान पर अपने अंदर बदले हुए उस इंसान को भी देखता है, जो शायद उसे अपने शहर में नहीं दिखता, वह सिर्फ उस स्थान की छवि ही अपने साथ लेकर नहीं लौटता, बल्कि एक अनुभव को अपने अंदर समाये, लौटता है, अपने आप से इस एक हलके से वादे के साथ की कभी फिर यहीँ आना है , और यही पल जीना है।

लेकिन इस सब की शुरुआत होती है उस दार्शनिक स्थान के होने से, और उस व्यक्ति के पास उस स्थान के होने की ख़बर से ।

किताबों की दुनिया अपने आप में एक सभ्यता है, यह हमारी धरोहर है। चुन चुन के योग्य कृतियों को इस धरोहर में शामिल करना, और योग्य लेखकों को उत्साहित करना हमारी ज़िम्मेदारी है, साहित्य जगत के प्रति ।



२५. ०१. २०१६
बेंगलूरु

रश्मी रेखा मान्ना
Yaar ko nahi pasand bediyan
Bas kaha ek din aur uth ke chal diya
Ki bediyon ki aadat thi hamari sanson ko
na baandh sake unhe hum
bas sanson ka silsila hi kho diya

Monday, July 24, 2017

बस अपनी कही और उठ कर चल दिए



बस अपनी कही और उठ कर चल दिए
मैंने कहा था," बादलों से निकल कर आउंगी किसी शाम;
कुछ हिसाब चुकाने हैं;
तुम्हारी मोहब्बत सिर्फ पानी नहीं कमानी है;
अगर भरोसा है तो रुकना
अपने अलफ़ाज़ निभाने आउंगी किसी शाम"
दो पल की देर
और वो शमा सरे शाम बुझाकर चल दिए 
बस अपनी कही और उठ कर चल दिए

Saturday, July 8, 2017

I hope it all makes sense at the end

I pray..

That on the last day of my life all of this makes sense to me

Why I laughed so much
Why I dreamt so much
Why I cried so much
I hope it makes sense to me

What I waited for so much
What I looked forward to so much
What was my eagerness all about
I hope it makes sense to me

Getting ready for an event and then unceremoniously putting everything back
Being about to embark on a journey and then dropping all plans
Going all the way to a stage then coming back without watching the performance 
I hope it all makes sense to me

One day I will see the completion of the tasks I take
I will see the fulfillment of commitments that they make
One day I will reach the finishing line of a race I take
And then it would all make sense to me

I hope, I pray, I entreat You my owner

Let there be one such moment when it all makes sense to me






Saturday, July 1, 2017

Love is easy if you drop your guards
It is easy to hug and just look into each other's eyes and remember everything good
It is easy to rekindle your dreams

Much easier than holding on to grudges, much easier than going through the pain of missing, much easier than bearing those deafening silences.

If only you love.......